बुधवार, 16 अगस्त 2017

फौजी की माँ


उत्पल शर्मा "पार्थ" 
राँची -झारखण्ड
वक़्त हो चला था परिवार वालों से विदा लेने का, छुट्टी ख़त्म हो गयी थी। घर से निकलने ही वाला था सहसा सिसकियों की आवाज से कदम रुक गए, मुड़ कर देखा तो बूढी माँ आँचल से अपने आंसुओं को पोछ रही थी। 

सूट की भूख


 सरबानी सेनगुप्ता  
आज जहाँ भी जाओ लेडीज सूट और कुर्तों का बोलबाला है | चाहे वो मॉल  हो या पटरी पर लगी दुकानें | सूट की भूख दिन को ही नहीं रात को भी औरतों को जगाये रखती है | यहाँ मैं अपने मोहल्ले का जिक्र कर रही हूँ |

हे श्याम सलोने



©किरण सिंह
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हे श्याम सलोने आओ जी 
अब तो तुम दरस दिखाओ जी 

राह निहारे यसुमति मैया 
तुम ठुमक ठुमक कर आओ जी 

आओ मधु वन में मुरलीधर
प्रीत की बंशी बजाओ जी

कोई तो हो जो सुन ले



कभी - कभी हमें एक तर्क पूर्ण दिमाग के जगह एक खूबसूरत दिल की जरूरत होती है जो हमारी बात सुन ले - अज्ञात 
                                 उफ़ !कितना बोलते हैं सब लोग , बक - बक , बक -बक | चरों तरफ शोर ही शोर | ये सच है की हम सब बहुत बोलते हैं | पर सुनते कितना हैं ?हम सुबह से शाम तक कितने लोगों से कितनी साड़ी बातें करते हैं | पर  कभी आपने गौर किया है की जब मन का दर्द किसी से बांटना चाहो तो केवल एक दो नाम ही होते हैं | उसमें से भी जरूरी नहीं की वो पूरी बात सुन ही लें | 

मंगलवार, 15 अगस्त 2017

सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस व् जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं



अद्भुत संयोग है की इस बार जन्माष्टमी व् स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जा रहा है | लीलाधर , नन्द नंदन योगेश्वर श्रीकृष्ण जिन्होंने जन्म के साथ ही परतंत्रता के खिलाफ युद्ध की शुरुआत कर दी थी | उन्होंने अपने जीवन पर्यंत उस समय प्रचलित अनेकों बन्धनों अनेकों कुरीतियों व् परम्पराओं को तोडा व् उनसे आज़ादी दिलवाई | आज ये अनुपम संयोग संकेत दे रहा है की भले ही सन १९४७ में हमें स्वतंत्रता मिल गयी हो पर आज़ादी की लड़ाई अभी बाकी है | ये लड़ाई किसी विदेशी आक्रांता के खिलाफ नहीं वरन अपने ही देश में व्याप्त भ्रष्टाचार , धर्मिक विद्वेष व् सामाजिक कुरीतियों के साथ हैं | जिनसे हमें स्वयं ही अपने - अपने स्तर पर लड़ना है और स्वतंत्र होना है |
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस व् जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

देश भक्ति के गीत




डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, देहरादून, उत्तराखंड
जय गान करें
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भारत का जय गान करें
आओ हम अपने भारत की
नई तस्वीर गढ़ें
भारत का....
अपनी कीमत खुद पहचाने
हम क्या हैं खुद को भी जाने

पिजड़े से आजादी

यूँही नही मिली एै दोस्त-------------- गुलाम भारत के पिजड़े की चिड़ियाँ को आजादी। यूँही नही इसके पर फड़फड़ाये खुले आकाश----- बहुत तड़पी रोई पिजड़े मे इसके उड़ने की आजादी।

कान्हा तेरी प्रीत में - जन्माष्टमी के पावन पर्व पर डॉ . भारती वर्मा की कवितायें



कान्हा तेरी प्रीत में ~पढ़िए प्रभु श्रीकृष्ण को समर्पित डॉ . भारती वर्मा की कवितायें 


1--कान्हा
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कान्हा तेरी प्रीत में
हुई बावरी मैं
तेरे रंग में रंग कर
हुई साँवरी में 
भावे न अब कछु मोहे
तुझे देखती मैं
दिवस हो या रैन अब

सोमवार, 14 अगस्त 2017

गीता के कर्मयोग की काव्यात्मक व्याख्या


गीता का तीसरा अध्याय कर्म योग के नाम से भी जाना जाता है प्रस्तुत है गीता के  कर्मयोग  की सरल काव्यात्मक व्याख्या /geeta ke karmyog ki saral kaavyaatmak vyakhya 

श्रीमती एम .डी .त्रिपाठी ( कृष्णी राष्ट्रदेवी ) 

अर्जुन ने प्रभु से  कहा 
सुनिए करुणाधाम 
मम मन में संदेह अति 
निर्णय दें घनश्याम 

पन्द्रह अगस्त


15 अगस्त पर एक खूबसूरत कविता

---रंगनाथ द्विवेदी

अपनो के ही हाथो--------- सरसैंया पे पीड़ाओ के तीर से विंधा, भीष्म सा पड़ा है------पन्द्रह अगस्त।

क्या है स्वतंत्रता सही अर्थ :जरूरी है स्वतंत्रता, स्वछंदता, उच्श्रृंखलता की पुनर्व्याख्या




डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, देहरादून, उत्तराखंड
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            स्वतंत्रता का क्या अर्थ है? 
स्वतंत्रता का अर्थ वही है जो हम समझना चाहते हैं, जो अर्थ हम लेना चाहते हैं। यह केवल हम पर निर्भर है कि हम स्वतंत्रता,स्वाधीनता,स्वच्छंदता और उच्छ्रंखलता में अंतर करना सीखें।

दोस्त


यात्रा




वंदना बाजपेयी
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ये जीवन एक सफ़र ही तो है और हम सब यात्री 

जीवन की गाडी तेजी से आगे भागती जा रही है | खिड़की से देखती हूँ तो खेत खलिहान नहीं दिखते | दिखता है जिन्दगी का एक हिस्सा बड़ी तेजी से पीछे छूटता जा रहा | वो बचपन की गुडिया , बचपन के खिलौने कब के पीछे छूट गए , पीछे छूट गए वो चावल जो ससुराल में पहला कदम रखते ही बिखेर दिए थे द्वार पर , बच्चों की तोतली भाषा , स्कूल का पहला बैग , पहली सायकिल ... अरे - अरे सब कुछ पीछे छूट गया | घबरा कर खिड़की बंद करती हूँ | 

रविवार, 13 अगस्त 2017

‘‘स्वतंत्रता दिवस’’ पर विशेष लेख : भारत बनेगा फिर से विश्व गुरु


15 अगस्त ‘‘स्वतंत्रता दिवस’’ पर विशेष लेख

- डाॅ. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ

(1) हम लाये हैं तूफान से किश्ती निकाल के:-

भारत के लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को अपने देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराया था। तब से इस महान दिवस को भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने देश की आजादी के लिए एक लम्बी और कठिन यात्रा तय की थी। देश को अन्यायपूर्ण अंग्रेजी साम्राज्य की गुलामी से आजाद कराने में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान तथा त्याग का मूल्य किसी भी कीमत पर नहीं चुकाया जा सकता।

आइये स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प लें नए भारत के निर्माण का


15 अगस्त ‘‘स्वतंत्रता दिवस’’ पर विशेष लेख

- डाॅ. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ
(1) हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं, 2022 तक नए भारत के निर्माण का:-
            1942 में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने एक संकल्प लिया था, ‘भारत छोड़ोका और 1047 में वह महान संकल्प सिद्ध हुआ, भारत स्वतंत्र हुआ। हम सब मिलकर संकल्प लेते हैं, 2022 तक स्वच्छ, गरीबी मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त, आतंकवाद मुक्त, सम्प्रदायवाद मुक्त तथा जातिवाद मुक्त नए भारत के निर्माण का। भारत के लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को अपने देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराया था। तब से इस महान दिवस को भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपने देश की आजादी के लिए एक लम्बी और कठिन यात्रा तय की थी। देश को अन्यायपूर्ण अंग्रेजी साम्राज्य की गुलामी से आजाद कराने में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान तथा त्याग का मूल्य किसी भी कीमत पर नहीं चुकाया जा सकता।