शनिवार, 18 मार्च 2017

बस्तों के बोझ तले दबता बचपन


   
           
जब सुकुमार छोटे बच्चों को बस्ते के बोझ से झुका स्कूल जाते देखतीं हूँ तो सोचती हूँ कि देश मेरांआजाद हो गया पर भारतीय मानस अभी तक परतन्त्र है क्योंकि अंग्रेज भारत छोड़ गये लेकिन अभिभावकों में अपने बालक को सीबीएसई स्कूल में पढ़ा अव्वल कहलाने की चाह स्वतंत्र भारत में भी पूर्णरूपेण जिंदा है । नौनिहालों को देख बरबस ये पंक्तियां फूट पड़ती है -------
      आज  शिक्षा निगल रही बचपन
बोझ बस्ते का कमर तोड़ रहा
       क्यों करते हो इनसे अत्याचार
भरने दो अब हिरनों सी कूदाल

शुक्रवार, 17 मार्च 2017

साहसी महिलायें हर क्षेत्र में बदलाव की मिसाल कायम कर रही हैं- प्रदीप कुमार सिंह



             विश्व की साहसी महिलायें हर क्षेत्र में मिसाल कायम कर रही हैं। कुछ ऐसी बहादुर तथा विश्वास से भरी बेटियों से रूबरू होते हैं, जिन्होंने समाज में बदलाव और महिला सम्मान के लिए सराहनीय तथा अनुकरणीय मिसाल पेश की है। देश में डीजल इंजन ट्रेन चलाने वाली पहली महिला मुमताज काजी हो या पश्चिम बंगाल में बाल और महिला तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाली अनोयारा खातून। ऐसी कई आम महिलाएं हैं जो भले ही बहुत लोकप्रिय न हो लेकिन उन्हें इस साल नारी शक्ति पुरस्कार के लिए चुना गया। राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को 30 महिलाओं को पुरस्कृत किया। पुरस्कार पाने वालों में नागालैण्ड की महिला पत्रकार बानो हारालू भी शामिल है जो नागालैण्ड में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है। उत्तराखण्ड की दिव्या रावत ग्रामीणों के साथ मशरूम की खेती को विकसित करने की भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस में कांस्टेबल स्मिता तांडी ने 2015 में जीवनदीप समूह बनाया जो गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक मदद करता है।

गुरुवार, 16 मार्च 2017

बड़े भाग्य से मानव शरीर मिला है!-डाॅ. जगदीश गाँधी







-डाॅ. जगदीश गाँधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ
(1) मानव जीवन अनमोल उपहार है:-
            आज के युग तथा आज की परिस्थितियों में विश्व मंे सफल होने के लिए बच्चों को टोटल क्वालिटी पर्सन (टी0क्यू0पी0) बनाने के लिए स्कूल को जीवन की तीन वास्तविकताओं भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक शिक्षायें देने वाला समाज के प्रकाश का केन्द्र अवश्य बनना चाहिए। टोटल क्वालिटी पर्सन ही टोटल क्वालिटी मैनेजर बनकर विश्व में बदलाव ला सकता है। उद्देश्यहीन तथा दिशाविहीन शिक्षा बालक को परमात्मा के ज्ञान से दूर कर देती है। उद्देश्यहीन शिक्षा एक बालक को विचारहीन, अबुद्धिमान, नास्तिक, टोटल डिफेक्टिव पर्सन, टोटल डिफेक्टिव मैनेजर तथा जीवन में असफल बनायेगी। तुलसीदास जी कहते है - ‘‘बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सदग्रंथनि पावा।। अर्थात बड़े भाग्य से, अनके जन्मों के पुण्य से यह मनुष्य शरीर मिला है। इसलिए हम इसी पल से सजग हो जाएं कि यह कहीं व्यर्थ न चला जाये। हिन्दू धर्म के अनुसार 84 लाख पशु योनियों में जन्म लेने के बाद अपनी आत्मा का विकास करने के लिए एक सुअवसर के रूप में मानव जन्म मिला है। यदि मानव जीवन में रहकर भी हमने अपनी आत्मा का विकास नहीं किया तो पुनः 84 लाख पशु योनियों में जन्म लेकर उसके कष्ट भोगने होंगे। यह स्थिति कौड़ी में मानव जीवन के अनमोल उपहार को खोने के समान है। यह सिलसिला जन्म-जन्म तक चलता रहता है। 

शुक्रवार, 10 मार्च 2017

राम नाम सत्य है


मेरी मौत 9 जून 2051 को होगी? यह तारीख एक ‘वेब-साइट’ वालों ने मेरे लिये निकाली है! है, भगवान, तेरे घर में भी आज इन ‘आईडेंटिटी थेफ्ट’ वालों ने कुछ सुरक्षित नही छोड़ा! साँठ-गांठ करके अब यह लोग हमारी मौत का रिकॉर्ड भी तुम्हारे यहाँ से ले आये हैं! एक रहस्य था और उसमे भी कितना रोमांच था कि एक दिन मेरी डार्लिंग, मेरे सपनो की रानी, मेरी मौत, मेरे पास आएगी और मुझे सजनी की तरह आकर अपने आगोश में भर लेगी और मैं आनंदित होकर सदा के लिए अपनी आँखें मूँद लूँगा। अब कर लों बात…यह रहस्य और रोमांस भी गया!
सन दो हज़ार इक्वञ्जा के जून महीने के नौवें दिन 24 घंटे के अंदर किसी भी वक्त मुझे मौत आ सकती है! अगर यह कमबख्त मेरे मरने का समय भी बता देते तो मैं उस दिन थोड़ा और सकून से मर जाता..। नहा-धोकर धूप-बती कर लेता .अपनी दाढ़ी-शेव बनाकर समय पर तैयार हो जाता। मेरे घर वाले भी चैन से अपना नाश्ता-लंच कर लेते या फिर अपना खाना-पीना उस घड़ी से कुछ आगे-पीछे कर लेते जब यमदूत अपना वाहन मुझे ढोने के लिए लाने वाले थे! अपने घर वालों से सफर में भूख लगने पर खाने के लिए कुछ ‘टिफन’ में ‘पेक’ करने का आग्रह कर लेता …न जाने कितना लंबा सफर हो…और न जाने कब जाकर किस पहर मुंह के रास्ते पेट में कोई निवाला जाये? कौन जानता है की ऊपर वाले के उधर भी कोर्ट-कचहरी जैसा ही होता हो और घर से अपनी रोटी बांध कर ले जानी होती हो? या

जय बाबा पाखंडी


ऐशो आराम बाबा बड़े बड़े दावे किया करते थे कि वह ईश्वर से साक्षात्कार करते है.भक्तों को भगवान् की कृपा मुहैया करते हैं .लेकिन वह भक्त का किस भगवान् से साक्षात्कार करवाते हैं इसका भंडाफोड़ उन्ही के जब एक भक्त ने किया तो वह सारे इलेक्ट्रोनिक एवं प्रिंट मीडिया वाले जो कभी उनके प्रोग्राम पीक टाइम में टेलीकास्ट करते थे और वर्गीकृत पेज पर उनके विज्ञापन छाप मोटी कमाई करते थे .उनके पीछे पूरी तरह नहा धोकर पड गए .पुलिस ने भी फ़िल्मी पुलिस के ढील का पेंच वाला आवरण उतार पूरी मुस्तैदी से उन्हें व् उनके रंगरसिया पुत्र उर्फ़ लगभग पूरे देश का इल्लीगल जमाई माफ़ करें छेडछाड साईं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया छेड़छाड़ साईं तो अपनी घटिया बुद्धि से छेड़छाड़ कर भाग निकलने में कामयाब हो गया मगर भागते चोर की लंगोटी की तरह ऐशो आराम लपेटे में आ गया .बाबा गिडगिडाते हुए अपनी मिमियाती आबाज में अपने भक्तों को भरोसा बनाये रखने की अपील करते हुए यह तर्क दे रहा था “भक्तो बाबा ने तुम्हे परम साक्षात्कार (बलात्कार)करवाया ,निस्संतानो की गोद हरी (या भरी)आपके नीरस जीवन में आत्मिक आनंद का रस प्रदान किया (कौनसा रस?)आप अपने बाबा पर भरोसा रखिये इश्वर जानता है सब देख रहा है (इश्वर से देखा नहीं गया तभी तो तुम्हे जेल पहुँचाया बाबा )”

न उम्र की सीमा हो


आज फिर दिमागी केंचुए कुछ सक्रिय हुए जब नज़र पड़ोस में रहने वाले चुकुंदीलाल जी पर पड़ी, 85 साल के श्री चुकुंदीलाल पुरातत्व विभाग में रखे किसी स्मृति चिन्ह से प्रतीत होते है, 85 साल की बांकी उम्र में नकली दांतों के साथ दन्तुरित मुस्कान बिखेरते अपनी आधी चाँद को जब सहलाते है तो पुराने हीरो बारी बारी मानस पटल पर आकर अपने स्टाइल में मुस्कुराते है ! अभी कुछ महीने पहले ही इस बांकी उम्र में श्री चुकुंदीलाल 26 साल की डॉली (जो अपनी जीरों साइज़ फिगर से सभी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, यानी बोले तो पूरे मुहल्ले की आँखों का नूर )….के साथ विवाह के अटूट बंधन में बंधे है, डॉली के शुभ चरण चुकुंदीलाल के उजाड़ जीवन में क्या पड़े चहुँ तरफ हरियाली छा गई है, और उनका बांकपन और निखर आया है, आजकल जनाब डेनिम जीन्स और टी शर्ट में घूमते नज़र आते है, और अपनी हर अदा पर इतराते है, उन्हें देख बेमेल विवाह पर बहुत से प्रश्न हमारे जेहन में मंडराने लगे काले बादलों से …..हमने जब डॉली को देखा तो तपाक से पूछा कि छोटी उम्र के सभी पुरुष क्या वनवास वासी हो गए है ? या कुंवारे कम उम्र युवकों का अकाल पड़ा है ? जो तुमने इतनी उम्र के पुरुष से विवाह किया और उसके बाद कैसे इतनी खुश नज़र आती हो ?

होली के रंग - हास्य कविताओं के संग





जल्दी से कर लीजिये हंसने का अभ्यास
इस बार की होली तो होगी खासमखास
दाँतन बीच दबाइए लौंग इलायची सौंफ
बत्तीसी जब दिखे तो मुँह से आये न बास

                                                                                         होली और हास्य में चोली दामन का साथ है | रंगों और गुझिया के साथ अगर भांग का भी स्वाद हो तो कहने ही क्या  |  टेंशन करने के लिए तोपूरा साल है पर बेवकूफियों पर हंसने का मौका तो एक बार होली पर ही मिलता है , न सिर्फ दूसरों  की बल्कि खुद की |  तो रंगने रंगाने के इस त्यौहार में हम भी पिचकारी ले कर तैयार हैं ............... स्र्र्रर्र्र्रर ... जी हां ! हमारी पिचकारी से निकल पड़े हैं हास्य कविताओं के रंग | आइये आप भी रंग जाइए | आप सही को होली की हार्दिक शुभकामनायें 
      वंदना बाजपेयी