शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

दिल्ली:जहाँ हर आम आदमी है ख़ास


                                       


बचपन की याद आती है जब माँ सुबह -सुबह हमें उठाते हुए कह रहीं थी "जरा  जल्दी उठ कर ठीक -ठाक कपडे पहन लो दिल्ली वाली चाची आने वाली हैं "वैसे तो हमारे घर मेहमानों का आना .-जाना लगा रहता था। उसमें कुछ ठीक -ठाक करने जैसा नहीं था ,पर चाची दिल्ली की थी।  चाची  पर इम्प्रैशन डालने का अर्थ सीधे संसद तक खबर।  हालाँकि   हम उत्तर प्रदेश के एक महानगर में रहते थे पर दिल्ली हमारे लिए दूर थी।  दिल्ली वो थी जहाँ की ख़बरों से अखबार पटे रहते थे। हमें अपने शह र की जानकारी हों न हो पर दिल्ली की हर घटना की जानकारी रहती थी गोया की हमारा शहर  दीवाने आम हो  और दिल्ली दीवाने ख़ास।  दिल्ली ,दिल्ली का विकास और दिल्ली के लोग हमारी कल्पना का आयाम थी।  बरसों बीते हम बड़े हुए ,हमारा विवाह हुआ और पति के साथ तबादले का शिकार होते हुए देश के कई शहरों का पानी पीते हुए आखिर कार दिल्ली पहुँच  ही गए। और दिल्ली आकर हमें पता चला की कितने भी आम हो अब हम आम आदमी /औरत नहीं रहे हैं। अब हम भी उन लोगों में शुमार हो गए हैं जो खबरे पढ़ते ही नहीं बल्कि ख़बरों का हिस्सा हैं।

                                                 पहला अनुभव हमें दिल्ली प्रवास के  दूसरे दिन ही हो गया जब हमारी प्रिय सखी का फोन दिल्ली पहुँचने की बधाई देने का आया।  बधाई  देने के बाद बोली "  बड़ी परेशानी होगी ,पानी नहीं आ रहा न तुम्हारे घर "अच्छा हमने सकपकाते हुए कहा ,पता नहीं नल खोल कर देखते हैं ,तुम्हें कैसे पता चला ?
अरे सुबह से क क क  चैनल पर दिखा रहे हैं  , दिल्ली में तुम्हारे एरिया में पानी नहीं आ रहा हैं लोग खाली बोतलें लेकर सड़कों पर हैं … टी वी नहीं देखा क्या तुमने ? पहली बार हमें बड़ा अटपटा लगा हमारे घर में पानी नहीं आ रहा है इसका पता हमसे पहले पूरे देश को है। हमारी निजी स्वतंत्रता का  कोई स्थान नहीं ? फिर तो यह रोज का सिलसिला हो गया।  हमने भी आपने आस -पास की बातों  पर ध्यान देना शुरू कर दिया क्योकि ,अडोस -पड़ोस में क्या हो रहा है इसकी खबर जाते ही सुदूर बसे परिवार के सदस्यों के लिए घटना की  आधिकारिक पुष्टि हमें
ही करनी होती थी अन्यथा हमारे समान्य ज्ञान पर प्रश्न चिन्ह लगने का पूरा ख़तरा था।
                                                                    एक बार तो हमारी कश्मीर वाली बहन हमसे  कई दिन तक इस बात पर नाराज रही कि सर्दियाँ होते ही सारे रिश्ते दारों के हमारे घर में "अपना और बच्चों का धयान रखना "के हिदायत भरे फोन आने लगते  जबकि वो -१० डिग्री से नीचे जम रही होती पर  उसके यहाँ कोई फोन नहीं पहुँचता, इस पारिवारिक भेदभाव में हमारा कोई हाथ नहीं था। ये तो टी वी  चैनल वाले २४ घंटे दिल्ली की सर्दी का आँखों देखा हाल बताते रहते ,,सर्दी की भयावता को देख दूसरे शहरों के लोग रजाई में किटकिटाते हुए भाग्य को सराहते "भैया दिल्ली की सर्दी से राम बचाए ".|  एक बार कानपुर  में एक रिश्तेदार की शादी में जाने पर हम चर्चा का केंद्र बन गए"बताओ क्या दिन आ गए हैं  दिल्ली में अबकी गर्मी में दो -दो घंटे बिजली काट रहे हैं।  जब सुनते -सुनते हम हम थक गए तो पूँछ ही लिया "कानपुर में कितने घंटे आती है  ?कोई ठीक नहीं पर २४ घंटे में १० -११  घंटे तो आ ही जाती है।  उत्तर प्रदेश की औद्यौगिक राजधानी बिजली की किल्लत से बुरी तरह जूझ रहीं है ,उद्योग -धंधे चौपट हैं ,भीषण बेरोजगारी  ने लूट पाट  को बढ़ा दिया है. पर दिल्ली में २ घंटे बिजली गुल होना खबरों का शहंशाह  बन कर तख्ते  ताऊस पर बैठा है।


                                              एक बार तो हद हो गयी रात को ११ बजे माँ का फोन आया। उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा "बिटिया अपना ,दामाद  जी का बच्चों का ध्यान रखना "क्यों माँ क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यों हो ?मैं उल्टा प्रश्न दागा। अभी -अभी टी वी चैनल में दिखा रहे हैं दिल्ली भूकंप से ज्यादा प्रभावित होने वाली जोंन  में आता हैं  ,हम तो घबरा गए। देखो ज्यादा बेख्याली में मत सोना। टंकी पूरी ना भरना … गमले………… माँ ने हिदायतों की पूरी लम्बी लिस्ट सुनानी शुरू कर दी। हमने बीच में ही माँ को रोकते हुए कहा माँ ठहरों जिस सेस्मिक जोंन  में दिल्ली  है उसी में आप का शहर भी है। चिंता न करिए।   माँ ने लगभग डांटते  हुए कहा "हमारा जी इतना घबरा रहा है ,और तुम्हे मजाक सूझ रहा है ,तुम्हे ज्यादा पता है या चैनल वालों  को.…  हम निरुत्तर हो गए हम बचपन में सुना चुटकुला याद आ गया "एक आदमी का परिक्षण कर रहे डॉक्टर ने नर्स से कहा ,ये मर चुका है तभी आदमी उठ कर बोला मैं जिन्दा हूँ ,मैं ज़िंदा हूँ , नर्स उसे टोंकते हुए बोली चुप राहों तुम्हें ज्यादा पता है या डॉक्टर को  "

                                 खैर अब तो हमें  ख़बरों में रहने की आदत हो गयी है दूसरे शहर तकलीफे आपदाए झेते रहे ,............पर.  खबर है तो दिल्ली की , …………  यहाँ हर आम घटना ,हर आम आदमी खबर का हिस्सा है चर्चा का विषय है इसीलिये यहाँ का हर आम आदमी ख़ास है।  और देखिये तो अब तो आम आदमी पार्टी भी चुनाव जीत कर ख़ास हो गयी है। 
वंदना बाजपेयी  
                         चित्र गूगल से साभार 

बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

चलती ट्रेन में दौड़ती औरत









कुछ ही मिनट विलंब के कारण ट्रेन छूट गयी कानोँ तक आवाज आई, पीरपैँती जानेवाली लोकल ट्रेन पाँच नंबर प्लेटफार्म पर खड़ी है गणतव्य तक पहुँचने
की नितांत आवश्यकता ने मतवाली गाड़ी के पीछे दौड़ लगाने को कहा हाँफते
हुए उस डब्बे के करीब पहुँचा जहाँ भीड़ कम दिखाई पड़ी देखते ही आँखेँ
झिलझिला गई, आदमी तो कम लेकिन बड़े गठ्ठर से लेकर छोटी बोड़िया की ढेर लगी
हुई

रविवार, 22 फ़रवरी 2015

लो भैया ! हम भी बन गये साहित्यकार





कहते हैं की दिल की बात अगर बांटी न जाए तो दिल की बीमारी बन जाती है और हम दिल की बीमारी से बहुत डरते हैं ,लम्बी -छोटी ढेर सारी  गोलिया ,इंजेक्शन ,ई सी  जी ,टी ऍम टी और भी न जाने क्या क्या ऊपर से यमराज जी तो एकदम तैयार रहते हैं ईधर दिल जरा सा चूका उधर प्राण लपके ,जैसे यमराज न हुए विकेट  कीपर हो गए..... तो इसलिए आज हम अपने साहित्यकार बनने  का सच सबको बना ही देंगे।ईश्वर को हाज़िर नाजिर मान कर कहते है हम जो भी कहेंगे सच कहेंगे अब उसमें से कितना आपको सच मानना है कितन झूठ ये आप के ऊपर निर्भर है।
                   बात पिछले साल की है ,हम नए -नए साठ  साल के हुए थे , सठियाना तो बनता ही था। बात ये हुई कि एक दिन चार घर छोड़ के रहने वाली मिन्नी की मम्मी आई ,उन्होंने हमें बताया की कि इस पुस्तक मेले में उनके काव्य संग्रह ( रात रोई सुबह तक ) का विमोचन है .... उन्होंने  इतनी  देर तक अपनी कवितायें सुनाई कि पूछिए  मत, ऊपर से एक प्रति हमारे लिए एक हमारे पति के लिए ,एक बेटे के लिए ,एक बहु के लिए उपहार स्वरुप दे गयी।इस उम्र में वो अचानक से  इतनी महान  बन गयी और हम हम अभी तक करछुल ही चला रहे हैं.हमारे अहंकार की इतनी दर्दनाक हत्या  तरह से हत्या हो गयी  कि खून भी नहीं निकला। हमें अपने जवानी के दिन याद आने लगे जब हम भी कविता लिखते थे। आह !क्या कविता होती थी।  क्लास के सब सहपाठी वाह -वाह करते नहीं अघाते थे ,वो तो घर -गृहस्थी में ऐसे उलझे कि … खैर आप भी मुलायजा  फरमाइए ……
"तेरी याद में हम दो मिनट में ऐसे सूख गए
जैसे जेठ की दोपहर में कपडे सूख जाते  हैं "
और
जैसे दोपहर  के बाद शाम का मंजर नज़र आया
हमें तेरे मिलने के बाद जुदाई का भय सताया
                                            अब मोहल्ले की मीटिंगों  में  मिन्नी की मम्मी साहित्यकार कहलाये और हम.……… हमारे जैसी  प्रतिभाशाली नारी सिर्फ मुन्ना की मम्मी कहलाये ये बात हमें बिलकुल हज़म नहीं हुई। हमने आनन -फानन में मुन्ना को अल्टीमेटम दे दिया "मुन्ना अगले पुस्तक मेले में हमारी भी कविताओ की किताब आनी  चाहिए।हमने जान बूझ कर मुन्ना के बाबूजी से कुछ नहीं कहा ,क्योंकि इस उम्र तक आते -आते पति इतने अनुभवी हो जाते हैं कि उन पर पत्नी के साम -दाम ,दंड ,भेद कुछ भी काम नहीं करते। पर हमारे मुन्ना ने तो एक मिनट में इनकार कर दिया " माँ कहाँ इन सब चक्करों में पड़ी हो। पर इस बार हमने भी हथियार नहीं डाले मुन्ना से कह दिया "देखो बेटा ,अगर तुम नहीं छपवा सकते हो तो हम खुद छपवा लेंगे ,पर हमने भी तय कर लिया है अपना काव्य संग्रह लाये बिना हम मरेंगे नहीं।हमारी इस घोषणा को बहु ने बहुत सीरियसली लिया ( पता नहीं सास कितना जीएगी )तुरंत मुन्ना के पास जा कर बोली देखिये ,आप चाहे मेरे जेवर बेंच दीजिये पर माँ का काव्य संग्रह अगले पुस्तक मेले तक आना ही चाहिए।
                                                   काव्य संग्रह की तैयारी शुरू हो गयी एक प्रकाशक से बात हुई ,उसने रेट बता दिया ,बोला देखिये नए कवियों के काव्य संग्रह ज्यादा बिकते तो नहीं हैं ,आप उतनी ही प्रति छपवाईए जितनी
बाँटनी हो। हमने घर आकर गिनना शुरू किया पहले नियर एंड डिअर फिर ,एक बिट्टू ,बिट्टू की मम्मी ,उसके पापा ,गाँव वाला ननकू , मिश्राइन चाची ,मंदिर के पंडित जी ,दूध वाला ………अरे काम वाली को कैसे भूल सकते हैं वो भले ही पढ़ न पाए पर चार घरों में चर्चा  तो जरूर करेगी  …………कुल मिला कर १०० लोग हुए ,उस दिन हमें अंदाजा लगा कि एक आम आदमी कितना आम होता है की उसे फ्री में देने के लिए भी १०० -१५० से ज्यादा लोग नहीं मिलते। खैर वो शुभ दिन भी आया जब हमारा काव्य संग्रह (घास का दिल ) छप  कर आया।  हमारा दिल ख़ुशी से हाई जम्प लगाने लगा।
                                हम अपने मित्रों ,रिश्तेदारों को लेकर पुस्तक मेले पहुचे। वहां पहुच कर पता चला कि अगर कोई बड़ा साहित्यकार विमोचन करे तो हम जल्दी महान  बन सकते हैं।  हमने लोगों से कुछ बड़े साहित्यकारों  के नाम पूंछे ,पता लगाने पर मालूम हुआ कि एक बड़े साहित्यकार पुस्तक मेले में आये हुए थे। बहु ने मोर्चा संभाला तुरंत उनके पास पहुची "सर मेरी सासु माँ की अंतिम ईक्षा है आप जैसे महान  व्यक्ति के हाथो उनके संग्रह का  विमोचन हो ,अगर आप कृपा करे तो मैं आपकी आभारी रहूंगी। एक खूबसूरत स्त्री का आग्रह तो ब्रह्मा भी न ठुकराए तो वो तो बस साहित्यकार थे।  तुरंत मंच पर आ गए ,एक के बाद एक पुस्तकों का विमोचन हो रहा था ,जिनका विमोचन चल रहा था वो मंच पर थे , नीचे नन्ही सी भीड़ में कुछ वो थे जिनका कुछ समय पहले विमोचन हुआ था ,वो बधाईयाँ व् पुस्तके समेत रहे थे ,कुछ वो थे जिनका अगला विमोचन था। हमारी भी पुस्तक का विमोचन। …………… लाइट ,कैमरा एक्शन ,कट की तर्ज़ पर हुआ। मिनटों में हम अरबों की जन्संसंख्या वाले भारत वर्ष में उन लाखों लोगो में शामिल हो गए जिनके काव्य संग्रह छप चुके  है।
                                                   खुशी से हमारे पैर जमीन पर नही  पड  रहे थे ,अब मिन्नी की मम्मी ,चिंटू की दादी , दीपा की मौसी के सामने हमारी कितनी शान हो जाएगी। दूसरे दिन बहु  ने अपना फेस बुक प्रोफाइल खोला "हमारी तो ख़ुशी के मारे चीख निकल गयी बहु  ने हमारी विमोचन की पिक डाली थी ,५७ लोगों को टैग किया था। .... कुल मिला कर १५० लएक ५० कमेंट थे.………………लो भैया अब हम भी साहित्यकार बन गए। एक बधाई तो आपकी भी बनती है

वंदना बाजपेयी 

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2015

स्टीफन हॉकिंग :हिम्मत वाले कभी हारते नहीं

स्टीफन हॉकिंग :हिम्मतवाले कभी हारते नहीं 






संक्षिप्त परिचय

स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी, 1942 को ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में हुआ था। गौरतलब हैकि यही वह तारीख थी, जिस दिन महान वैज्ञानिक गैलिलियो का भी जन्म हुआ था। चूंकि वे एक मेधावी छात्र थे, इसलिए स्कूल और कॉलेज में हमेशा अव्वल आते रहे। मैथमेटिक्स को प्रिय विषय मानने वाले स्टीफन हॉकिंग में बड़े होकर अंतरिक्ष-विज्ञान में एक खास रुचि जगी। यही वजहथा किजब वे महज 20 वर्ष के थे, कैंब्रिज कॉस्मोलॉजी विषय में रिसर्च के लिए चुन लिए गये इसके बाद इसी विषय में उन्होंने पीएचडी भी की।

एक जंग जो खुद से जीती 
                    २१ वर्ष की आयु तक हॉकिंग  भी सामान्य मेधावी बालक थे जिसकी आँखों में सैकड़ो सपने थे  एक दिन वो घटना घट गयी जिसने उन्हें एक अलग कैटेगिरी में धकेल दिया ।  जब वो 21 साल के थे तो एक बार छुट्टियाँ  मानाने के मानाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे , वो सीढ़ी से उतर रहे थे की तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वो तुरंत ही नीचे गिर पड़े।उन्हें डॉक्टर के पास ले जायेगा शुरू में तो सब ने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी पर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें बड़े डोक्टरो के पास ले जाया गया , जहाँ ये पता लगा कि वो एक अनजान और कभी न ठीक होने वाली बीमारी से ग्रस्त है जिसका नाम है न्यूरॉन मोर्टार डीसीस ।इस बीमारी में शारीर के सारे अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते है।और अंत में श्वास नली भी बंद हो जाने से मरीज घुट घुट के मर जाता है।डॉक्टरों ने कहा हॉकिंग बस 2 साल के मेहमान है। लेकिन हॉकिंग ने अपनी इच्छा शक्ति पर पूरी पकड़ बना ली थी और उन्होंने कहा की मैं 2 नहीं २० नहीं पूरे ५० सालो तक जियूँगा । उस समय सबने उन्हें दिलासा देने के लिए हाँ में हाँ मिला दी थी, पर आज दुनिया जानती है की हॉकिंग ने जो कहा वो कर के दिखाया ।अपनी इसी बीमारी के बीच में ही उन्होंने अपनी पीएचडीपूरी की और अपनी प्रेमिका जेन वाइल्ड से विवाह किया तब तक हॉकिंग का पूरा दाहिना हिस्सा ख़राब हो चूका था वो stick के सहारे चलते थे ।
क्या है  योगदान :
             दरअसल, जिस क्षेत्र में योगदान के लिए उनको याद किया जाता है, वह कॉस्मोलॉजी ही है। कॉस्मोलॉजी, जिसके अंतर्गत ब्रह्माण्ड  की उत्पत्ति, संरचना और स्पेस-टाइम रिलेशनशिप के बारे में अध्ययन किया जाता है। और इसीलिए उन्हें कॉस्मोलॉजी का विशेषज्ञ माना जाता है, जिसकी बदौलत वे थ्योरी ऑफ 'बिग-बैंग और 'ब्लैक होल्स की नई परिभाषा गढ़ पाने में कामयाब हो सके हैं।



कुछ सवाल जवाब 
 दुनिया के महान वैज्ञानिक हॉकिंग से बात की बीबीसी संवाददाता टिम मफ़ेट ने।
पछताने से अच्छा है वो करो जो कर सकते  हैं :-

अपने जीवन पर बन रही इस फ़िल्म के बारे में पूछने पर हॉकिंग कहते हैं ''यह फ़िल्म विज्ञान पर केंद्रित है, और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे लोगों को एक उम्मीद जगाती है। 21 वर्ष की उम्र में डॉक्टरों ने मुझे बता दिया था कि मुझे मोटर न्यूरोन नामक लाइलाज बीमारी है और मेरे पास जीने के लिए सिर्फ दो या तीन साल हैं। इसमें शरीर की नसों पर लगातार हमला होता है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इस बीमारी से लड़ने के बारे में मैने बहुत कुछ सीखा''

हॉकिंग का मानना है कि हमें वह सब करना चाहिए जो हम कर सकते हैं, लेकिन हमें उन चीजों के लिए पछताना नहीं चाहिए जो हमारे वश में नहीं है।


किस उपलब्धि पर है सबसे ज्यादा गर्व :-
हॉकिंग को अपनी कौन सी उपलब्धि पर सबसे ज्यादा गर्व है? हॉकिंग जवाब देते हैं ''मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की है कि मैंने ब्रह्माण्ड को समझने में अपनी भूमिका निभाई। इसके रहस्य लोगों के लिए खोले और इस पर किए गए शोध में अपना योगदान दे पाया। मुझे गर्व होता है जब लोगों की भीड़ मेरे काम को जानना चाहती है।''



'परिवार और दोस्तों के बिना कुछ नहीं'

यह पूछने पर कि क्या अपनी शारीरिक अक्षमताओं की वजह से वह दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक बन पाए, हॉकिंग कहते हैं, ''मैं यह स्वीकार करता हूँ मैं अपनी बीमारी के कारण ही सबसे उम्दा वैज्ञानिक बन पाया, मेरी अक्षमताओं की वजह से ही मुझे ब्रह्माण्ड पर किए गए मेरे शोध के बारे में सोचने का समय मिला। भौतिकी पर किए गए मेरे अध्ययन ने यह साबित कर दिखाया कि दुनिया में कोई भी विकलांग नहीं है।''

गॉड पार्टिकल:दुनिया का विनाश  
          हॉकिंग ने आगाह किया है कि महज दो साल पहले वैज्ञानिकों ने जिस मायावी कण गॉड पार्टिकल’ की खोज की थी उसमें समूचे ब्रह्मांड को तबाह-बरबाद करने की क्षमता है।
एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार हॉकिंग ने एक नई किताब स्टारमस’ के  में लिखा कि अत्यंत उच्च उर्जा स्तर पर हिग्स बोसोन अस्थिर हो सकता है। इससे प्रलयकारी निर्वात क्षय की शुरुआत हो सकती है जिससे दिक् और काल ढह जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इस ब्रह्मांड में हर जो चीज अस्तित्व में है हिग्स बोसोन उसे रूप और आकार देता है।
हॉकिंग ने बतायाहिग्स क्षमता की यह चिंताजनक विशिष्टता है कि यह 100 अरब गिगा इलेक्ट्रोन वोल्ट पर अत्यंत स्थिर हो सकती है। वह कहते हैंइसका यह अर्थ हो सकता है कि वास्तविक निर्वात का एक बुलबुला प्रकाश की गति से फैलेगा जिससे ब्रह्मांड प्रलयकारी निर्वात क्षय से गुजरेगा।
हॉकिंग ने आगाह कियायह कभी भी हो सकता है और हम उसे आते हुए नहीं देखेंगे। बहरहालउन्होंने कहा कि इस तरह के प्रलय के निकट भविष्य में होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन उच्च उर्जा में हिग्स के अस्थिर होने के खतरे इतने ज्यादा हैं कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


स्वर्ग-मृत्यु के बाद जीवन जैसी अवधारणा परियों के किस्से कहानी की तरह है.
और उन लोगों के लिए है जो मौत से डरते हैं.
‘द गार्डियन’ को दिए गए साक्षात्कार में ‘ए ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम’ के लेखक और मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग कहा कि जब मस्तिष्क अपने आखिरी समय में होता है तो उसके बाद ऐसा कुछ नहीं होता.
हाकिंग 21 साल की उम्र से ही मोटर न्यूरान बीमारी का इलाज करा रहे हैं. उन्होंने कहा मैं पिछले 49 साल से जल्द मरने की संभावना के साथ जी रहा हूं लेकिन मुझे मरने की कोई जल्दबाजी नहीं हैं. मेरे पास बहुत कुछ है जो मैं पहले करना चाहता हूं.
उन्होंने कहा मैं दिमाग को एक कंप्यूटर की तरह समझता हूं जो उसके अलग-अलग हिस्सों के असफल होने की वजह से काम करना बंद कर देता है.
कंप्यूटर के खत्म होने के बाद कोई स्वर्ग अथवा मौत के बाद जीवन जैसी बात नहीं होती. जो लोग अंधेरे से डरते हैं यह उनके लिये परियों के किस्से कहानियों जैसा है.
साक्षात्कार के दौरान हाकिंस ने मृत्यु के बाद के जीवन की अवधारणा को खारिज कर दिया और उन्होंने अपनी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल करते हुए धरती पर बेहतर जीवन की आवश्यकता पर बल दिया
एलियंस के बारे में 
 उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर दिया है और वैश्विक स्तर पर एक आशंकाभरी बहस को भी जन्म दिया है. क्या धरती एलियन्स के निशाने पर आ सकती है? क्या किसी अंतरग्रहीय युद्ध में इंसानी प्रजाति और इस शानदार ग्रह का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है? यदि हां, तो ऐसा कब तक संभव है और क्या हम इसे टाल सकते हैं? डिस्कवरी टीवी चैनल पर प्रसारित किए जाने वाले कायर्क्रमों की बेहद चर्िचत श्रृंखला में स्टीफन हाकिंग ने मोटे तौर पर दो बातें कही हैं। पहली. अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना वास्तविक है, और दूसरी. एलियन्स से मेलजोल के प्रयास सुखद परिणाम ही लेकर आएं, यह जरूरी नहीं। इस संपर्क का परिणाम लगभग वैसा ही हो सकता है, जैसा क्रिस्टोफर कोलंबस के आने का 'नई दुनिया' (अमेरिका) के मूल निवासियों पर हुआ था। उनका मानना है कि जो एलियन्स धरती पर आएंगे वे असल में अपने ग्रहों पर संसाधनों का इतना अधिक दोहन कर चुके होंगे कि ये ग्रह प्राणियों के रहने योग्य नहीं रह गए होंगे। वे विशाल अंतरिक्षयानों में ही रहने को मजबूर होंगे और रास्ते में जो भी ग्रह आएगा, उसके संसाधनों को निशाना बनाएंगे। उनका बर्ताव दोस्ताना ही हो, यह जरूरी नहीं है।

‘ए ब्रीफ  हिस्ट्री ऑफ टाइम 
स्टीफन हाकिंग को लोकरुचि विज्ञान लेखन की कला में भी महारत हासिल है। उनकी एक पुस्तक ‘ए ब्रीफ  हिस्ट्री ऑफ टाइम’ ने आम जन की जिज्ञासाओं को न सिर्फ शांत ही किया है वरन् और जानने के लिये उत्सुक भी बनाया है। इस क्षेत्र में आगे आने के लिये इस पुस्तक ने कई युवाओं को आकृष्ट किया है। इसके बाद इसे अपडेट करते हुए उन्होंने लीनार्ड म्लोडिनोव के साथ ए ब्रीफर हिस्ट्री ऑफ टाइमलिखी है। इस पुस्तक में क्वांटम मेकेनिक्स, स्ट्रिंग थ्योरी, बिग बैंग थ्योरी और कई अन्य क्लिष्ट विषय अत्यंत सरल भाषा में समाहित हैं। ‘ब्लेक होल्स एण्ड बेबी यूनिवर्सेस एण्ड अदर एसेज और दी यूनिवर्स इन ए नटशैल’ ब्रह्माण्ड की परतों को उघाड़ती उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है। उनकी एक और पुस्तक ‘थ्योरी ऑफ एव्हरी थिंग’ है। इसमें उन्होंने सात व्याख्यानों की एक ाृंखला प्रस्तुत की है जिसमें बिगबैंग से लगा कर ब्लेक होल तथा स्ट्रिंग सिद्धांत का सिलसिलेवार वर्णन है। इस पुस्तक से हमें ब्रह्माण्ड के इतिहास पर उनके दृष्टिकोण से परिचय मिलता है। हाल ही में उनकी पुस्तक ‘ग्रेंड डिजाइन’ प्रकाशित हुई है। यह भी बेमिसाल है। इसमें कई ऐसे प्रश्नों को उठाया गया है जिनके उत्तर की तलाश में कई-कई महापुरुषों ने अपना सारा जीवन लगाया है। इसमें उन्होंने ब्रह्माण्ड कब और कैसे अस्तित्व में आया, क्यों यहाँ कुछ है, आखिर वास्तविकता क्या है, प्रकृति के नियम ऐसे क्यों बने हैं जिसमें हम जैसे प्राणियों का उदय हो सका है, क्या कोई भगवान है ब्रह्माण्ड जैसी इस महारचना के निर्माण के पीछे या यह विज्ञान सम्मत है आदि जैसे झकझोरने वाले प्रश्नों को हाकिंग ने बड़ी खूबसूरती से अपनी इस पुस्तक में उठाया और उत्तर देने का प्रयास किया गया है। इसतरह अपनी अपंगता पर अकल्पनीय विजय पाने वाले वे आज की दुनिया के बिरले उदाहरण एवं रोल मॉडल बन कर सामने आये हैं। बच्चे भी उनकी नजर से बचे नहीं हैं। ब्रह्माण्ड जैसे विषय में उनकी रुचि जगाने और उन्हें प्रेरित करने के लिये उन्होंने अपनी बेटी लूसी के साथ ‘जार्ज्स सीक्रेट की टू दी यूनिवर्स’ और ‘जार्ज्स कॉस्मिक ट्रजर हंट’ लिखी है। वे पृथ्वी से बाहर अंतरिक्ष में जीवन की खोज के अभियान को समर्थन नहीं देते हैं। अपनी गणितीय अवधारणाओं के आधार पर वे मानते हैं कि अंतरिक्ष इतना विशाल है कि कई ऐसी जगहें अवश्य ही है जहाँ जीवन का होना निश्चित है। लेकिन वे सलाह देते हुए कहते हैं कि हमें उनसे संपर्क करने में से बचना चाहिये क्योंकि संपर्क होने पर एलियन संसाधनों की तलाश में पृथ्वी पर हमला करने सें नहीं चूकेंगे।
.
अविस्मर्णीय भारत यात्रा 
 स्टीफन  हॉकिंग की भारत यात्रा ने विज्ञान में रुचि रखने वाले भारतवासियों को मंत्रमुग्ध सा कर दिया। ब्रिटेन के वि·श्वविख्यात कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्राध्यापक प्रो. स्टीफन हाकिंग को जिजीविषा का एक अप्रतिम उदाहरण कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। शारीरिक रूप से भले ही वे अक्षम हैं किन्तु उनकी मानसिक पारंगतता अद्वितीय हैं। भौतिकशास्त्र और खगोलशास्त्र जैसे जटिल विषयों में उन्होंने जो काम किया है, वह अद्वितीय है।
"ब्लैक होल्स' अथवा "श्याम विवर' पर शोध कर उन्होंने एक ऐसा सिद्धान्त प्रतिपादित है जिसकी आधिकारिक काट अभी तक सामने नहीं आई है।अपनी भारत यात्रा के
 दौरान प्रो. हाकिंग दिल्ली में थे जहां राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन से एक औपचारिक भेंट और कुछ अनौपचारिक कार्यक्रमों के अलावा उन्होंने अपना आधिकारिक व्याख्यान दिया। 17 जनवरी को नई दिल्ली के सीरी फोर्ट सभागार में अल्बर्ट आइंस्टाइन व्याख्यानमाला के अंतर्गत प्रो. हाकिंग ने "भविष्य का अनुमान: खगोल विज्ञान से श्याम विवर तक' विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसका आयोजन "सेन्टर फार फिलास्फी एंड फाउंडेशन आफ साइंस' संस्था ने किया था।
इसी विषय पर विश्व भर में सराही गई पुस्तक "ए ब्रीफ हिस्ट्री आफ टाइम' (समय का संक्षिप्त इतिहास) के लेखक प्रो. हाकिंग ने अपने व्याख्यान में कहा कि भविष्य का आकलन करना लगभग असंभव है और स्वयं ई·श्वर भी इसका अनुमान नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के नियम के कारण भविष्य का सही आकलन करना टेढ़ी खीर है। किसी कण की तरंगित क्रियाओं को ही समझा जा सकता है, उसकी वास्तविक स्थिति और गति को समझना असंभव है। मानव जाति ने हमेशा ही भविष्य पर नियंत्रण अथवा कम से कम, आकलन करना चाहा है कि आगे क्या होगा। यही कारण है कि खगोल विज्ञान इतना प्रसिद्ध हुआ है।
दुनिया का "जीवित आइंस्टाइन' कहे जाने वाले प्रो. हाकिंग का व्याख्यान सुनने आए लोगों से सभागार भरा हुआ था। उनके विषय में पिछले कई दिनों से छपते आ रहे समाचारों के कारण दिल्ली में उनकी खासी प्रसिद्धि हो चुकी थी। सभागार पहुंचने वाले सभी मार्गों पर यातायात अवरुद्ध सा हो गया था। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण बड़े-बड़े अधिकारी और महिलाएं, बच्चे अपनी कारों को छोड़कर पैदल ही सभागार की ओर लपकते दिख रहे थे। वरिष्ठ नौकरशाह, अधिकारी, नेता, मंत्री, वैज्ञानिक, नीति-निर्धारक, पत्रकारों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में विकलांग भी व्याख्यान सुनने आए थे। कार्यक्रम 5 बजे शुरू होना था पर चूंकि प्रो. हाकिंग स्वयं यातायात में फंसे थे अत: 5.40 से पहले उनका व्याख्यान शुरू न हो सका। अपना व्याख्यान शुरू करने से पहले प्रो. हाकिंग ने कम्प्यूटर के माध्यम से "वाइस सिंथेसाइजर' की आवाज में पूछा-"कैन यू हियर मी?' (क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं?) जब श्रोताओं ने हां, कहा तब उन्होंने एक के बाद एक ब्राह्मांड और खगोलशास्त्र के गूढ़ रहस्यों पर से पर्दा उठाना शुरू किया।
बच्चो के लिए अच्छी खबर :कॉमिक किताब के पात्र होंगे हॉकिंग 
प्रख्यात ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग एक कॉमिक किताब के पात्र होंगे और यह किताब उनकी जिंदगी के तमाम पहलुओं के बारे में लोगों को बताएगी। ‘स्काई न्यूज’ की एक रिपोर्ट कहती है कि 71 साल के हॉकिंग जल्द ही एक कॉमिक किताब के पात्र के तौर पर पेश किए जाएंगे। इस किताब में हॉकिंग के कॉलेज के दिनों, कैंब्रिज में एक शोधकर्ता के तौर पर उनके काम और उनके कुछ अहम आविष्कारों के बारे में बताया जाएगा।
इस कॉमिक किताब का नाम है ‘स्टीफन हॉकिंग : रिडल्स ऑफ टाइम एंड स्पेस’। इसके लेखकों ने बताया कि इससे जानेमाने वैज्ञानिक के व्यक्तित्व और उनसे जुड़े मिथ के बारे में भी जानकारी मिलेगी। कलाकार जेच बैसेट ने कहा, ‘इस किताब में सबसे खास बात यह होगी कि इसमें यह बताया जाएगा कि वैज्ञानिक के दिमाग में क्या चल रहा है। तस्वीरों के जरिए एक गतिशील अंदाज में उनके कुछ अहम आविष्कारों को भी लोगों के सामने लाया जाएगा।’

स्टीफन हॉकिन्स को सर्वोच्च सम्मान 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मशहूर गणितज्ञ प्रो.स्टीफन हॉकिंग को अमेरिका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "मेडल ऑफ फ्रीडम" से सम्मानित करने की घोषणा की है। 
फेस बुक पर भी हैं हॉकिंग 
72 वर्षीय हाकिंग 7 अक्तूबर को फेसबुक में शामिल हुए और तब से उनके आधिकारिक पन्ने को 14,15,213 लाइक मिले हैं.हाकिंग ने अपने पहले पोस्ट में लिखा, ‘‘मुझे हमेशा आश्चर्य रहा कि किस चीज से ब्रह्मांड टिका है. काल और दिक् शायद हमेशा पहेली बने रहें, लेकिन इसने मेरी तलाश नहीं रोकी.’’ उन्होंने लिखा, ‘‘एक दूसरे के साथ हमारे रिश्ते अनंत तक बढ़े हैं और अब मेरे पास मौका है, मैं आपके साथ यह सफर साझा करने के लिए उत्सुक हूं. जिज्ञासु रहें, मैं जानता हूं मैं हमेशा रहूंगा.’’ दुर्लभ एमियोट्रोफिक लैटरल सलेरोसिस बीमारी से ग्रस्त। लाइवसाइंस की रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक के पन्ने की देखरेख हाकिंग की टीम करती है और जब भौतिकीविद् खुद पोस्ट डालते हैं तो उसपर ‘‘एसएच’’ का हस्ताक्षर होता है.

प्रस्तुतकर्ता :अटूट बंधन परिवार 

अपने पाठको के लिए जानकारी उपलब्ध कराने हेतू  और स्टीफन हॉकिंग को सम्मान देने के लिए हमने यह जानकारी गूगल से विभिन्न श्रोतों से एकत्र की हैं समस्त चित्र गूगल से लिए हैं ,इसके लिए हम गूल का आभार व्यक्त करते हैं 

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

महाशिवरात्री पर शिव स्तुति

महाशिवरात्रि पर शिव स्तुति 





महा शिव रात्री अर्थार्थ शिव -पार्वती के विवाह की रात्री , एक ऐसा शुभ दिन जो शिव -पार्वती के रूप में आदर्श दाम्पत्य  के अर्धनारीश्वर रूप को मान्यता देता है, जो शाश्वत है ,सत्य है और जन्म -मरण की सीमा से परे है।अज हम भी शिव -पार्वती के भक्ति के रंग में रंग जाते हैं 

माहाशिवरात्री 
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि  का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव का पूजन किया जाता है तथा व्रत रखा जाता है। शिवपुराण की कोटिरुद्र संहिता में महाशिवरात्रि व्रत का महत्व बताया गया है। 
शिवपुराण के अनुसार जो व्यक्ति महाशिवरात्रि का व्रत करता है उसे भोग एवं मोक्ष दोनों ही प्राप्त होते हैं। इस व्रत से पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी मनुष्यों, तथा देवताओं के लिए यह महान व्रत परम हितकारी है। प्रत्येक मास के शिवरात्रि व्रतों में से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी में होने वाले महाशिवरात्रि का शिवपुराण में विशेष महत्व बताया गया है।



आदर्श दाम्पत्य के प्रतीक हैं शिव पार्वती -
                                    
                                         शिव और पार्वती की अर्धनारीश्वर के रूप में अराधना की जाती है जहाँ पुरुष और स्त्री के बीच सारे द्वन्द समाप्त हो जाते हैं वो दो नहीं है एक है बिना किसी अवरोध के बिना किसी भेद भाव के और यही सफल दाम्पत्य का रहस्य भी है ,यू तो  शिवरात्रि शिव-पार्वती के विवाह का दिन है परंतु वास्तव में यह पर्व है पुरुष और प्रकृति के मिलन का। पुरुष अर्थात् शिव और प्रकृति साक्षात् पार्वती।
शिव और शिवा दोनों का पार नहीं पाया जा सकता, लेकिन यह भी सच है कि सृष्टि-सृजन और उसके चक्र को चलायमान रखने में दोनों का अहम योगदान है। दोनों में से एक के बिना सृष्टि संचालन थम जाएगा।
बात चाहे सृष्टि निर्माण और उसके संचालन की हो या परिवार की गाड़ी हांकने की, पुरुष और प्रकृति का समान रूप से योगदान देना उतना ही जरूरी है जैसे जीवन में निर्णय लेते वक्त मन और बुद्धि का उपयोग।
शिव का सती से विवाह, हवनकुंड की अग्नि से सती का जीवन समाप्त करना, वियोग में शिव का वैराग्य धारण करना, पार्वती के रूप में सती का पुनर्जन्म और शिवरात्रि पर पार्वती का शिव से विवाह केवल यही दर्शाता है कि पुरुष और प्रकृति दोनों का समान एक-दूसरे के बिना दोनों अधूरे हैं।
सृष्टि एक वृहद उदाहरण है वास्तव में शिव और पार्वती के मिलन का यह दिन यही संदेश देता है कि जीवन, परिवार या सुख-दुख की गाड़ी को हांकना किसी एक के बस की बात नहीं। सती रूप में पत्नी के न होने पर शिव रूपी पति वैराग्य की ओर बढ़ जाते है। आज के युग में वैराग्य के मायने बदल गए हैं।
सामाजिक दायित्वों से खुद को मन से नहीं जोड़ पाना, अपने मन की पीड़ा को मन में ही दबाना और जरूरत पड़ने पर दिखावे की हंसी के रूप में खुशी व्यक्त करना भी तो वैराग्य ही है। वहीं दूसरे पक्ष में नारी को देखें तो पुरुष की यह स्थिति पार्वती रूपी नारी को भी दुखी करती है। बात सहज है दोनों में से यदि एक पक्ष विचलित, अकेला या परेशान है तो दूसरे पक्ष पर भी खुश नहीं रह सकता।
शिव-पार्वती के विवाह का यह दिन केवल आराधना का ही पर्व नहीं बल्कि यह बात भी समझाता है कि पुरुष और महिला का जीवन में ही नहीं बल्कि सृष्टि में समान अधिकार, वर्चस्व और स्थान है।
शिव और शिवा एक-दूसरे से अलग तो हो सकते हैं पर अलग होकर न तो वे सुखी रह सकते हैं और ना ही संतुष्ट भाव से सृष्टि को सुख दे सकते हैं। शायद इसलिए ही शिव-पार्वती की जोड़ी को सबसे आदर्श दांपत्य के रूप में पूजा जाता है।
शिव को विश्वास था कि पार्वती के रूप में सती लौटेगी तो पार्वती ने भी शिव को पाने के लिए तपस्या के रूप में समर्पण का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।
वर्तमान में आवश्यकता है शिवरात्रि पर्व को धर्म से ही नहीं बल्कि जीवन के इस पहलू से जोड़कर देखने की ताकि सृष्टि में पुरूष-प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।सफल दाम्पत्य किसी  भी जीवन की खुशी  का रहस्य है और यही तो माँगा जाता है आज के दिन की जिस प्रकार शिव -पार्वती की जोड़ी अज़र -अमर है वैसे ही हर जोड़ी के मध्य प्रेम बना रहे 
महाशिवरात्री की व्रत कथा 














एक बार पार्वती ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्यु लोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?' उत्तर में शिवजी ने पार्वती को 'शिवरात्रि' के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- 'एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।

शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया।अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिनभर बंदीगृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढँका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।



पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए।एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुँची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, 'मैं गर्भिणी हूँ। शीघ्र ही प्रसव करूँगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब तुम मुझे मार लेना।' शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गई।
                                  कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, 'हे पारधी ! मैं थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूँ। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।'शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, 'हे पारधी! मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊँगी। इस समय मुझे मत मार।'

शिकारी हँसा और बोला, 'सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे।'उत्तर में मृगी ने फिर कहा, 'जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान माँग रही हूँ। हे पारधी! मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ।'मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के आभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्व करेगा।

शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला,' हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊँगा।'मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना-चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, 'मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।'



उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गए। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया।देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।'

शिव अराधना मन्त्र 

भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र ही अमोघ एवं मोक्षदायी है, किंतु विषम काल में यदि भक्त पर कोई कठिन व्याधि या समस्या आन पड़े तब श्रद्धापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ' के मंत्र का एक लाख जप करना चाहिए। यह बड़ी से बड़ी समस्या और विघ्न को टाल देता है। 










|| श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र ||

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय| 

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे "न" काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय| 

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे "म" काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय| 

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै "शि" काराय नमः शिवायः॥

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय| 

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै "व" काराय नमः शिवायः॥

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय| 

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै "य" काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत शिव सन्निधौ| 

शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते॥






द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।
कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥:





॥ श्रीरुद्राष्टकम् ॥
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ॥ ३॥
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् ।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६॥
न यावत् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८॥
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति ॥
॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं संपूर्णम् ॥





॥ रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र
*********************

जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥
धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥
सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥
ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥
कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥
नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥
प्रफुल्ल नीलपंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥
कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌ ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥
पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

शिव पूजा के अंत में इस रावणकृत शिव तांडव स्तोत्र का प्रदोष समय में गान करने से या पढ़ने से लक्ष्मी स्थिर रहती है। रथ गज-घोड़े से सर्वदा युक्त रहता है।
॥ इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ 




शिव आरती 

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥


प्रस्तुतकर्ता  अटूट बंधन परिवार 

समस्त चित्र गूगल से साभार , रचनायें गूगल से विभिन्न श्रोतो से एकत्र की हैं 
आप सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं