रविवार, 24 जनवरी 2016

बाबा नागार्जुन की 5 कवितायें



गुलाबी चूड़ियां 

प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ,
सात साल की बच्ची का पिता तो है!
सामने गियर से उपर
हुक से लटका रक्खी हैं
काँच की चार चूड़ियाँ गुलाबी
बस की रफ़्तार के मुताबिक
हिलती रहती हैं…

शनिवार, 23 जनवरी 2016

पंखुरी सिन्हा की कवितायें



युवा कवियत्री पंखुरी सिन्हा की कलम जब चलती है सहज ही प्रभावित करती है | वह अनूठे विषयों को उठाकर अपने सहज प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उन्हें और भी अद्वितीय बना देती हैं | प्रस्तुत हैं उनकी कुछ अनुपम कवितायें ....

साँझ काजल लगाये
और लगा था
कि छोटे शहर के
उस बगीचे वाले घर में
चले जाने के बाद
दम ही घुट जाए
कि खुलता तो है
सूर्योदय की दिशा में

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

किशोर बच्चे : बढ़ती जिम्मेदारियाँ




  किशोरावस्था ! संधिकाल..... जहाँ बाल्यावस्था जाने को है और यौवन दस्तक दे रहा है। यह ऐसी अवस्था है कि बचपन पूरी तरह से गया नहीं और योवन द्वार पर आ खड़ा हुआ....ठीक ऐसे कि पहले से आया एक अतिथि गया नहीं कि दूसरे अतिथि ने घर के गेट पर दस्तक दे दी। देखा जाए तो किशोरावस्था ऐसी कोमल अवस्था है जहाँ सब कुछ अच्छा और सुंदर दिखाई देता है, जहाँ अंगड़ाई लेता यौवन सामने होता है, पर बचपन की कोमलता भी बनी रहती है। सतरंगी सपने उड़ान भरने, सीमाएँ तोड़ने को प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे में बंधन, उपदेश बिलकुल अच्छे नहीं लगते। अच्छे लगते हैं तो केवल अपने मित्र ! उ

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार





१) अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.
२ ) कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है. अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल  हो या अन्य निर्बल हैं.
३ )अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.
४ ) हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.
५ ) विश्व एक व्यायामशाला है  जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं
६ ).इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है.
७ )  हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा, और परमात्मा उसमे बसेंगे.
८ ) भगवान् की  एक  परम प्रिय  के  रूप  में  पूजा  की  जानी  चाहिए, इस  या  अगले  जीवन  की  सभी  चीजों  से  बढ़कर .
९ ) यदि  स्वयं  में  विश्वास  करना  और  अधिक  विस्तार  से  पढाया  और  अभ्यास  कराया  गया  होता, तो  मुझे  यकीन  है  कि  बुराइयों  और  दुःख  का  एक  बहुत  बड़ा  हिस्सा  गायब  हो  गया होता .
१० ) एक विचार लो. उस  विचार  को  अपना जीवन  बना  लो – उसके  बारे  में  सोचो  उसके  सपने  देखो , उस  विचार  को  जियो . अपने  मस्तिष्क, मांसपेशियों , नसों , शरीर  के  हर  हिस्से  को  उस विचार में  डूब  जाने  दो , और  बाकी  सभी विचार  को  किनारे  रख  दो. यही सफल  होने  का तरीका  है.

मंगलवार, 12 जनवरी 2016

स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष : जब स्वामी जी ने डायरी में लिखा , " मैं हार गया हूँ "






आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर उनके जीवन का एक प्रसंग दे रहा हूँ जो यह बताता हैं की  आपका मन दुर्बल और निसहाय है। इसलिए कोई दृष्‍टि कोण पहले से तय मत करो।तटस्थता मन की शक्ति है | 

 स्वामी जी ने शिकागो की धर्म संसद में भाषण देकर दुनिया को ये एहसास कराया कि भारत विश्व गुरु है। अमेरिका जाने से पहले स्वामी विवेकानंद जयपुर के एक महाराजा के महल में रुके थे। यहां एक वेश्या ने उन्हें एहसास कराया कि वह एक संन्यासी हैं।

सोमवार, 11 जनवरी 2016

कहानी संग्रह -मुट्ठी भर धूप(दस कहानियाँ


                              आज आप के सामने प्रस्तुत है    कहानी संग्रह ( ई -बुक ) मुट्ठी भर धूप | इसमें हम अटूट बंधन ब्लॉग में प्रकाशित १० श्रेष्ठ कहानियों को ( पाठकों द्वारा पढ़े जाने के आधार पर )  एक ई -बुक के रूप आप के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं | इसमें से हर कहानी किसी समस्या को उठती व् उसका समाधान खोजती हुई समाज को दिशा देने वाली है | इसमें आप पढेंगे | शशि श्रीवास्तव , वंदना  बाजपेयी , उपासना सियाग , वंदना गुप्ता , विनीता शुक्ला , शिवानी कोहली , कुसुम पालीवाल ,स्वेता मिश्रा ,सपना मांगलिक व् रोचिका शर्मा की कहानियाँ
नोट ... कृपया कहानी पढने के लिए कहानी के नाम को ( जो लाल रंग से पेंटेड है ) क्लिक करें  

रविवार, 10 जनवरी 2016

३० साल बाद - रविन्द्र कालिया



हिंदी साहित्य जगत के दैदीप्यमान सितारे रविन्द्र कालिया जी का कल शनिवार को अनंत ज्योति में लीं हो गए | कालिया जी की रचनाएँ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं | उनकी रचनाओं में खुदा सही सलामत है , ई बी सी डी , १७ रानाडे रोड ( उपन्यास ) , नौ साल छोटी पत्नी (कहानी संग्रह)  , नींद क्यों रात भर नहीं आती ( व्यंग संग्रह ) प्रमुख हैं | 
               कालिया जी केन्द्रीय हिंदी निदेशालय की पत्रिका भाषा और धर्मयुग से जुड़े रहे | वे भारतीय भाषा परिषद् की पत्रिका " वागर्थ"  के भी संपादक रहे |उन्हें अनेकों पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया | उनकी रचनायें देश -विदेश के विश्व विद्यालयों में शामिल है | अटूट बंधन परिवार की और से  कालिया जी को विनम्र श्रधांजलि |  

                     ३० साल बाद - कहानी ( रविन्द्र कालिया ) 

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाओ के साथ कविताओ का गुलदस्ता



मंगलमय हो नव वर्ष 
पूरब से
उतरी नव किरणें
प्रदीप्त हुआ प्रभाकर नवीन
आज प्रभात के घाट पर
परिदृश्य हैं नवनीत