शनिवार, 23 जनवरी 2016

पंखुरी सिन्हा की कवितायें



युवा कवियत्री पंखुरी सिन्हा की कलम जब चलती है सहज ही प्रभावित करती है | वह अनूठे विषयों को उठाकर अपने सहज प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उन्हें और भी अद्वितीय बना देती हैं | प्रस्तुत हैं उनकी कुछ अनुपम कवितायें ....

साँझ काजल लगाये
और लगा था
कि छोटे शहर के
उस बगीचे वाले घर में
चले जाने के बाद
दम ही घुट जाए
कि खुलता तो है
सूर्योदय की दिशा में

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

किशोर बच्चे : बढ़ती जिम्मेदारियाँ




  किशोरावस्था ! संधिकाल..... जहाँ बाल्यावस्था जाने को है और यौवन दस्तक दे रहा है। यह ऐसी अवस्था है कि बचपन पूरी तरह से गया नहीं और योवन द्वार पर आ खड़ा हुआ....ठीक ऐसे कि पहले से आया एक अतिथि गया नहीं कि दूसरे अतिथि ने घर के गेट पर दस्तक दे दी। देखा जाए तो किशोरावस्था ऐसी कोमल अवस्था है जहाँ सब कुछ अच्छा और सुंदर दिखाई देता है, जहाँ अंगड़ाई लेता यौवन सामने होता है, पर बचपन की कोमलता भी बनी रहती है। सतरंगी सपने उड़ान भरने, सीमाएँ तोड़ने को प्रेरित करते रहते हैं। ऐसे में बंधन, उपदेश बिलकुल अच्छे नहीं लगते। अच्छे लगते हैं तो केवल अपने मित्र ! उ

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार





१) अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.
२ ) कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है. ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है. अगर कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल  हो या अन्य निर्बल हैं.

मंगलवार, 12 जनवरी 2016

स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष : जब स्वामी जी ने डायरी में लिखा , " मैं हार गया हूँ "






स्वामी विवेकानंद भारत का ही नहीं पूरे विश्व का गौरव हैं | कहते हैं होनहार बिरवान के होत चीकने पात | बचपन से ही स्वामी जी के लक्ष्ण ऐसे दिख रहे थे की वो आगे चलकर महान बनेगे | पर महँ बनना इतना भी आसान नहीं होता | महँ बन्ने की राह में कई बार मन आड़े आता है | स्वामी जी का भी मन आड़े आया |दरसल वो एक पूर्वाग्रह के शिकार थे |  पर उन्होंने उसको जीत लिया | इस जीत की वजह बनी एक वेश्या | आज मैं आपके साथ उसी प्रसंग को शेयर करना चाहती हूँ | 


सोमवार, 11 जनवरी 2016

कहानी संग्रह -मुट्ठी भर धूप(दस कहानियाँ


                              आज आप के सामने प्रस्तुत है    कहानी संग्रह ( ई -बुक ) मुट्ठी भर धूप | इसमें हम अटूट बंधन ब्लॉग में प्रकाशित १० श्रेष्ठ कहानियों को ( पाठकों द्वारा पढ़े जाने के आधार पर )  एक ई -बुक के रूप आप के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं | इसमें से हर कहानी किसी समस्या को उठती व् उसका समाधान खोजती हुई समाज को दिशा देने वाली है | इसमें आप पढेंगे | शशि श्रीवास्तव , वंदना  बाजपेयी , उपासना सियाग , वंदना गुप्ता , विनीता शुक्ला , शिवानी कोहली , कुसुम पालीवाल ,स्वेता मिश्रा ,सपना मांगलिक व् रोचिका शर्मा की कहानियाँ
नोट ... कृपया कहानी पढने के लिए कहानी के नाम को ( जो लाल रंग से पेंटेड है ) क्लिक करें  

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाओ के साथ कविताओ का गुलदस्ता



मंगलमय हो नव वर्ष 
पूरब से
उतरी नव किरणें
प्रदीप्त हुआ प्रभाकर नवीन
आज प्रभात के घाट पर
परिदृश्य हैं नवनीत