मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

सुशांत सुप्रिय के कहानी संग्रह की समीक्षा - किस्सागोई का कौतुक देती कहानियाँ ( सुषमा मुनीन्द्र)







                                 समीक्ष्य कृति
 - दलदल (कहानी संग्रह) ( अंतिका प्रकाशन , ग़ाज़ियाबाद ) 2015.

 - किस्सागोई का कौतुक देती कहानियाँ 
    
                                       १
सुपरिचित रचनाकार सुशांत सुप्रिय का सद्यः प्रकाशित कथा संग्रह दलदल’ ऐसे समय में आया है जब निरंतर कहा जा रहा है कहानी से कहानीपन और किस्सागोई शैली गायब होती जा रही है।  संग्रह में बीस कहानियाँ हैं जिनमें ऐसी ज़बर्दस्त किस्सागोई है कि लगता है शीर्षक कहानी दलदल’ का किस्सागो बूढ़ादक्षता से कहानी सुना रहा है और हम कहानी पढ़ नहीं रहे हैं वरन साँस बाँध कर सुन रहे हैं कि आगे क्या होने वाला है।  पूरे संग्रह में ऐसा एक क्रमएक सिलसिला-सा बनता चला गया है कि हम संग्रह को पढ़ते-पढ़ते पूरा पढ़ जाते हैं।  कभी उत्सुकताकभी जिज्ञासाकभी भयकभी सिहरनकभी आक्रोशकभी खीझकभी कुटिलता,कभी कृपा से गुजर रहे पात्र इतने जीवंत हैं कि सहज ही अपने भाव पाठकों को दे जाते हैं।

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

‘वैलेन्टाइन दिवस’ को मनाएं ‘पारिवारिक एकता दिवस’

                                                             

(1) ‘वैलेन्टाइन दिवस’ के वास्तविक, पवित्र एवं शुद्ध भावना को समझने की आवश्यकताः-
संसार को ‘परिवार बसाने’ एवं ‘पारिवारिक एकता’ का संदेश देने वाले महान संत वैलेन्टाइन के ‘मृत्यु दिवस’ को आज जिस ‘आधुनिक स्वरूप’ में भारतीय समाज में स्वागत किया जा रहा है, उससे हमारी भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता प्रभावित हो रही है। संत वैलेन्टाइन ने तो युवा सैनिकों को विवाह करके परिवार बसाने एवं पारिवारिक एकता की प्रेरणा दी थी। इस कारण अविवाहित युवा पीढ़ी का अपने प्रेम का इजहार करने का ‘वैलेन्टाइन डे’ से कोई लेना-देना ही नहीं है। आज वैलेन्टाइन डे के नाम पर समाज पर बढ़ती हुई अनैतिकता ने हमारे समक्ष काफी असमंज्स्य तथा सामाजिक पतन की स्थिति पैदा कर रखी है। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण आज लड़कियों तथा महिलाओं के विरूद्ध अपराध, छेड़छाड़, अश्लीलता, बलात्कार, हत्या आदि जैसी जघन्य घटनायें लगातार बढ़ती ही जा रहीं हैं।

अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -४ सम्पादकीय -नगर ढिंढोरा पीटती प्रीत न करियो कोय





नगर ढिंढोरा पीटती प्रीत न करियो कोय .............

शायद ,बहुत पीड़ा से गुज़रता होगा प्रेम
जब –जब हम सिद्ध करते होंगे
उसकी उपस्तिथि
किसी पिज़्ज़ा हट में
किसी महंगे टेडी बीयर में
या किसी दिल के आकार के खिलौने में
लेने और देने में
तब –तब शायद , बहुत याद करता होगा प्रेम
किसी  तुलसी को
जो स्वेक्षा से बन जाते  है दास
किसी राधा को
जो छोड़ देती है हर रंग
या किसी मीरा को
जो अपना एक तारा लेकर
दीवानी बन निकल पड़ती हैं जगलों में

अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -३ सम्पादकीय




कुछ खो कर पाना है ........

चलों
कि जाने कि बेला आई है
तैयार हैं पालकी ,
सिंदूर मांग टीका , बड़ी लाल टिकुली
कहीं कमी न रह जाए दुल्हन के श्रृंगार में
फिर एक बार गले लग के
जी भर के रो लें
समेट लें यादों कि पोटली को
और कर दें विदा समय कि दुल्हन को
जो चली जायेगी क्षितिज के उस पार
छोड़ कर अपनी ढेर सारी  स्मृतियाँ
कुछ हंसने को

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -२ सम्पादकीय

                 



जीतनें के लिए चाहिए जोश और जूनून  
दिसंबर का महीना , साल का  आखिरी महीना | समय के वृक्ष पर २०१५ कि पीली  पत्तियाँ झड़ने को और २०१६ कि नन्हीं हरी कोंपलें उगने को तैयार हैं | आगत के स्वागत के उत्साह  में दबे पांव चलता  रहता है  बीते वर्ष का आकलन | क्योंकि शाश्वत जीवन में कुछ भी आखिरी नहीं होता न पल , न दिन , न वर्ष , न ही यह जन्म | हर आखिरी एक बुनियाद बनता है नए की | चाहे वो पल हो , दिन हो या जीवन | उसी बुनियाद पर रखी जाती है नए कि नींव | इसीलिये हमारे पूर्वज समझा गए हर पल का महत्व है | मैं  भी बीते वर्ष के लाखों पलों का हिसाब  करना  चाहती हूँ |  मुझे लगता है जैसे मैं  एक विशाल सागर के तट पर खड़ीं हूँ और स्मृतियों कि लहरे आ कर मेरे मानस  को भिगो कर लौट रहीं हैं |मैं चुन लेती हूँ हूँ कुछ पलों के मोती |

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -४ , अंक -१६ अनुक्रमणिका




अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -४ , अंक -१६ अनुक्रमणिका
*सम्पादकीय –जिंदगी का हिस्सा है स्पीड ब्रेकर
*सम्पादकीय (कार्यकारी संपादक )- नगर ढिंढोरा पीटती प्रीत न करियो कोय
*खुद मर कर ही मिलता है स्वर्ग – डॉ तेजबहादुर सिंह –बिहार
*रोग भय  पर टिका सेहत का कारोबार –डॉ अलका खत्री –चंडीगढ़
*आवरण कथा –प्रेम में है सकारात्मक उर्जा
*लघुकथाएं –शशि बंसल , पूनम पाठक
*संकट में जागती हैं सुप्त शक्तियाँ – डॉ .विवेक सिन्हा –चेन्नई
*विशेष आलेख - होंठ देख कर जाने स्वाभाव -डॉ मधुरिमा 
*संकल्प उदित होते ही छटता  है अँधेरा –प्रदीप चतुर्वेदी –पंजाब
*व्यंग – तौबा इस संसार में भांति –भांति के प्रेम – प्रियंका सेठ –गुजरात
*नारी मन – मंगलसूत्र:  बंधन है प्यार का - प्रियंवदा रावत नयी दिल्ली
*काव्य जगत ...
चिंतामणि जोशी –असफल प्रेमी
रश्मि प्रभा –खैर
किरण सिंह – रूठे तुम हो तुम ही बोलो
साधना सिंह –मेरे शब्द
पंखुरी सिन्हा –शब्द और मौसम
डॉली अग्रवाल –प्रेम दीवानी
अम्बरीश त्रिपाठी –यादें
*जीवन मन्त्र – आत्मनियंत्रण है सफलता की पहली सीढ़ी –उर्मिला दुबे गोरखपुर
*कहानी –एक प्यार ऐसा भी –स्वेता मिश्रा –नाइजीरिया
*स्वास्थ्य : थाईराइड : संभव है उपचार –डॉ सोमनाथ झा तेलंगाना
*बाल जगत – बोर्ड परीक्षाएं : सही तैयारी है सफलता की कुंजी –डॉ जगदीश गाँधी ( संस्थापक प्रबंधक सिटी मांटेसरी स्कूल लखनऊ
*ज्योतिष /वास्तु -वास्तु के अनुसार कैसा हो आपके बच्चे का स्टडी रूम –पंडित अविनाश आचार्य वाराणसी
*वैलेन्टाइन डे  पर विशेष – आई लव यू यानी जादू की झप्पी... सरबानी सेनगुप्ता 
*आध्यात्म -ओशो – प्रेम स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं
*दिल को छूती बातें .....बात जो दिल को  जाए
*प्रेरक विचार व् रोचक तथ्य व् अन्य स्थायी स्तम्भ
* प्रेरक कथा - सुकरात की शिक्षा 
*फरवरी माह का राशि फल




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