रविवार, 29 मई 2016

लघुकथा - सूकून



 
कुमार गौरव
मौलिक एवं अप्रकाशित

एक छुट्टी के दिन कोई पत्रकार कुछ अलग करने के ख्याल से जुगाड़ लगाकर ताजमहल में घुस गया ।
बहुत अंदर जाने पर उसे एक बेहद खूबसूरत औरत अपने नाखून तराशती हुई मिली । पत्रकार को आश्चर्य हुआ दोनों की नजरें मिली तो उसने पूछा " कौन से चैनल से हो । "
उसने बिना चेहरे पर कोई भाव लाये कहा " मैं यहीं रहती हूं । "
लडकी कुछ दिलचस्प लगी सो उसने कैमरा ऑन कर लिया और बात शुरु करी " कब से रहती हो यहाँ । "
"बहुत पहले ये बनने के कुछ दिनों बाद से ही । "
"अच्छा ये बताओ शाहजहां को तुमने देखा था कैसे थे । "

गुरुवार, 26 मई 2016

इश्वर का कामकाज


 


एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान- आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे,
एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बन कर खड़ा हो जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आओ l
भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो
भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना कुछ बोलना नहीं,
मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है, सेवक मान जाता है l
सबसे पहले मंदिर में बिजनेस मैन आता है और कहता है, भगवान मैंने एक नयी फैक्ट्री
डाली है, उसे खूब सफल करना l

गुरुवार, 12 मई 2016

अपना -अपना स्वार्थ


 



एक  बार एक आदमी अपने छोटे से बालक के साथ एक घने जंगल से जा रहा था!   तभी रास्ते मे उस बालक को प्यास लगी ,  और उसे पानी पिलाने उसका पिता उसे एक  नदी पर ले गया , नदी पर पानी पीते पीते अचानक वो बालक पानी मे गिर गया ,  और डूबने से उसके प्राण निकल गए!   वो आदमी बड़ा दुखी हुआ,  और उसने सोचा की इस घने जंगल मे इस बालक की अंतिम क्रिया किस प्रकार करूँ !   तभी उसका रोना सुनकर एक गिद्ध ,  सियार और नदी से एक कछुआ वहा आ गए ,  और उस आदमी से सहानुभूति व्यक्त करने लगे ,  आदमी की परेशानी जान कर सब अपनी अपनी सलाह  देने लगे!

रविवार, 8 मई 2016

अटूट बंधन वर्ष -२ अंक -७ सम्पादकीय “ माँ “ ... कहीं बस संबोधन बन कर ही न रह जाए






“ माँ “ ... कहीं बस संबोधन बन कर ही न रह जाए
   डुग – डुग , डुग , डुग ... मेहरबान कद्रदान , आइये ,आइये  मदारी का खेल शुरू होता है | तो बोल जमूरे ...
 जी हजूर
सच –सच बताएगा
जी हजूर
आइना दिखाएगा
जी हजूर
दूध का दूध और पानी का पानी करेगा
जी हजूर
तो दिखा .... क्या लाया है अपने झोले में
हजूर , मैं अपने झोले में लाया हूँ मनुष्य को ईश्वर का दिया सबसे नायब तोहफा
सबसे नायब तोहफा ... वो क्या है जमूरे , जल्दी बता
हुजूर , ये वो तोहफा है , जिसका इंसान अपने स्वार्थ के लिए दोहन कर के फिर बड़ी बेकदरी करता है |
ईश्वर  के दिए नायब तोहफे की बेकद्री , ऐसा क्या तोहफा है जमूरे ?
हूजूर ..वो तोहफा  है ... माँ
माँ ???
जी हजूर , न  सिर्फ जन्म देने वाली बल्कि पालने और सँभालने वाली भी
वो कैसे जमूरे
बताता हूँ हजूर , खेल दिखता हूँ हजूर ......
               हाँ ! तो मेहरबान कद्रदान , जरा गौर से देखिये ... ये हैं एक माँ  ,चार  बच्चों की माँ ,  ९० साल की रामरती देवी |झुर्रियों से भरा चेहरा ,

शुक्रवार, 6 मई 2016

पॉजिटिव थिंकिंग पर सद्विचार /positive quotes





* जब आप सोचते हैं की आप कर सकते हैं  और जब आप  सोचतें हैं की आप नहीं कर सकते हैं दोनों ही बार आप सही हैं 

कैंसर






कैंसर
बस एक ही शब्द 
काफी था सुनने के लिए 
अनसुनी ही रह गयी 
उसके बाद दी  गयी सारी  हिदायते 
पहली दूसरी या तीसरी स्टेज का वर्णन 
बस दिखाई देने लगी