बुधवार, 20 जुलाई 2016

व्यंग - हमने भी करी डाई-ईटिंग





लेख का शीर्षक देख कर ही आप हमरी सेहत और उससे उत्पन्न परेशानियों के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं |आज के ज़माने में मोटा होना न बाबा न ,ये तो करीना कपूर ब्रांड जीरो फीगर का युग है ,यहाँ मोटे लोगों को आलसी लोगों की कतार में बिठाते देर नहीं लगती|यह सब आधुनिक संस्कृति का दोष है हमें आज भी याद है कि हमारी दादी अपने ८० किलो वज़न के साथ पूरे शान से चलती थी और लोग उन्हें खाते –पीते घर वाली कह कर बात –बात पर भारत रत्न से सम्मानित किया करते थे |पर आज के जामने में पतला होना स्टेटस सिम्बल बन गया है ,आज जो महिला जितने खाते –पीते घर की होती है वो उतनी ही कम वजन की होती है ,क्योकि उसी के पास ट्रेड मिल पर दौड़ने हेतु जिम की महंगी फीस चुकाने की औकात होती है या उसके पास ही ब्रेकफास्ट और सुबह के नाश्ते की जिम्मेदारी नौकरों पर छोड़ कर मोर्निग वाक पर जाने का समय होता है ….. बड़े शहरों में तो महिला का वजन देख कर उसके पति की तनख्वाह का अंदाजा लगाया जाता है,कई ब्यूटी पार्लर में महिलाओं का वजन देख कर पति की तनख्वाह बताने वाला चार्ट लगा रहता है,इसी आधार पर उनके सिंपल ,गोल्डन या डाएमंड फेसियल किया जाता है

मंगलवार, 19 जुलाई 2016

रूपये की स्वर्ग यात्रा




त्रिपाठी जी  और वर्मा जी मंदिर के बाहर से निकल रहे थे ।
आज मंदिर में पं केदार नाथ जी का प्रवचन था ।

प्रवचन से दोनों भाव -विभोर हो कर उसकी मीमांसा कर रहे थे ।

वर्मा जी बोले  क्या बात कही है "सच में रूपया पैसा धन दौलत सब कुछ यहीं रह जाता है कुछ भी साथ नहीं जाता फिर भी आदमी इन्ही के लिए परेशान रहता है"

त्रिपाठी जी ने हाँ में सर हिलाया ' अरे और तो और एक -दो  रूपये के लिए भी उसे इतना क्रोध आ जाता है जैसे स्वर्ग में बैंक खोल रखा है "। गरीबों पर  दया और परोपकार किसी के मन में रह ही नहीं गया है ।

वर्मा जी ने आगे बात बढाई ' रुपया पैसा क्या है , हाथ का मैल है आज हमारा है तो कल किसी और का होगा'

बुधवार, 6 जुलाई 2016